खेत का नक्शा

जितना खेत है दखल में
दूसरों के कब्जे में है उससे ज्यादा
कागज पर जो लिखा है वह अपनी जगह है
जो जोत रहा है वह अपनी जगह
दोनों को एक साथ रखकर भी 
फैसला नहीं होता कुछ

धुर धुर जमीन पर 
सबकी नजर टिकी हुई है
जो हड़पने वाले हैं
वे इस फिराक में हैं कि
जब मौका मिले 
दो कदम आगे बढ़ाकर जोत लें
मिला लें अपना खेत नई मेड़ देकर
इस तरह सिकुड़ रहे हैं खेत
जैसे कपड़े छोटे पड़ते जाते हैं 
ठीक उसी तरह
खेत की देह घट रही है
गल रही है दिन रात

खेत का नक्शा कोई कहां तक लेकर जाएगा
कोर्ट कचहरी थाना पुलिस
सब न्याय के लिए बैठे हैं
लेकिन वह न्याय कोई अमरूद नहीं
जिसे तोड़ा जाए अपनी मर्जी मुताबिक

बक्से में बंद है खेत का नक्शा
खेत के कागज तिजोरी में हैं
अक्सर लड़ाई होती है खेत में
जहां कोई नहीं होता तीसरा 

बाद में बहस होती है
पंचायत होती है
सबकुछ होता है लेकिन बेनतीजा
हार कर वह लौटता है घर हर बार

अब वह अपने ही खेत जाता है तो 
डर डर कर जाता है
क्या पता कौन छिपा हो 
मक्के के खेत में
लेकर धारदार हथियार


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