रात नदी है साहिल दिन
पसरे हुए हैं बोझिल दिन
आँख खुली है वहशत में
ख़्वाबों के हैं क़ातिल दिन
भूल कहाँ पाते हैं लोग
अपने दुख में शामिल दिन
मुझमें रोया करते हैं
रात गए तक चोटिल दिन
यार मुझे समझाते हैं
कट जाने हैं मुश्किल दिन
रात नदी है साहिल दिन
पसरे हुए हैं बोझिल दिन
आँख खुली है वहशत में
ख़्वाबों के हैं क़ातिल दिन
भूल कहाँ पाते हैं लोग
अपने दुख में शामिल दिन
मुझमें रोया करते हैं
रात गए तक चोटिल दिन
यार मुझे समझाते हैं
कट जाने हैं मुश्किल दिन